हिमाचल में आर्थिक सुधार: वीआईपी खर्चों पर कैंची और वेतन में भारी कटौती

हिमाचल में आर्थिक सुधार: वीआईपी खर्चों पर कैंची और वेतन में भारी कटौती

Economic Reforms in Himachal

Economic Reforms in Himachal

शिमला। Economic Reforms in Himachal, आमजन की आलोचनाओं से बचने के लिए प्रदेश सरकार ने आर्थिक मोर्चे पर साहसिक कदम उठाया है। कैबिनेट रैंक प्राप्त लोगों का दर्जा वापस लेने के साथ-साथ वेतन में 20 प्रतिशत की कटौती की है। यह तय माना जा रहा है कि बुधवार से शुरू हो रहे बजट सत्र के दूसरे चरण में मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू स्वयं व मंत्रियों, विधायकों के वेतन में कटौती संबंधित निर्णय लेने की घोषणा कर सकते हैं।

वर्तमान सरकार ने गत वर्ष बजट सत्र के अंतिम दिन विधायकों का वेतन बढ़ाने का निर्णय लिया था। मंत्रियों के भत्तों में वृद्धि की गई थी। पूर्व विधायकों की पेंशन में भी वृद्धि की गई थी।

बजट सत्र शुरू होने से पहले 18 मार्च को कांग्रेस विधायक दल की बैठक में आरएस बाली व भवानी सिंह पठानिया ने कैबिनेट रैंक सहित अन्य कटौती करने की पेशकश की थी।

विधायकों का बढ़ा था 85 हजार रुपये वेतन 

गत वर्ष वेतन वृद्धि से पहले प्रत्येक विधायक को 2.10 लाख रुपये मासिक वेतन मिलता था। वेतन वृद्धि होने के बाद वेतन बढ़कर 2.95 लाख मासिक हो गया था। इसी तरह से पूर्व विधायक को मासिक पेंशन 93240 रुपये मासिक मिलती थी, जो बढ़कर 129500 रुपये मासिक हो गई थी। ये पेंशन धनराशि एक बार के विधायक की थी, जबकि एक से अधिक बार विधायक को प्रति वर्ष 1 हजार रुपये की मासिक पेंशन वृद्धि प्राप्त होती है।

अक्टूबर में मंत्रियों के भत्तों में हुई थी वृद्धि 

16 अक्टूबर, 2025 को मुख्यमंत्री को कुल 3.40 लाख रुपये मासिक मिलने की व्यवस्था शुरू हुई थी। इसी तरह से विधानसभा अध्यक्ष, कैबिनेट मंत्री, नेता प्रतिपक्ष व मुख्य सचेतक को 3.20 लाख रुपये, राज्य मंत्री व उप-मुख्य सचेतक को 3.18 लाख, विधानसभा उपाध्यक्ष को 3.17 लाख, उप मंत्री को 3.05 लाख रुपये वेतन, भत्तों सहित धनराशि अधिसूचित की गई थी।